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यथार्थ परम का......

यथार्थ की खोज वह भी परम का कोई मामूली बात नहीं है।  बड़े -बड़े ऋषि मुनियो ने पूरा जीवन समर्पित कर दिया। यथार्थ की खोज करने से मतलब  परम सत्ता की खोज यानि ईश्वर की खोज  है। खोज अनवरत चलते रहना जरुरी है।  समाज का अंग और अपने ऊपर उसका कर्ज का आभास है मुझमे।  इसलिए यथार्थ की खोज करने की दिशा में  एक छोटा प्रयास शुरू करने का निर्णय लिया है। आज से यह खोज चलता रहेगा। जब दुनिया में लोभ , माया , स्वहित लोगो के जेहन में पहुंचकर उन्हें सामाजिक सरोकारों से दूर कर रही हो उस समय यथार्थ की बात करना बड़ी चुनौती है।  लेकिन कर्म का कोई जोड़ है जो इस कार्य के लिए प्रेरणादाई है......